चमत्कारी बरस का असर

एक समय की बात है|एक छोटा सा गांव था |गांव में एक गरीब कलाकार रहता था| जिसका नाम मोहन था |ट्रेन में वह हर रोज अपने चित्र बेचने वाला जाता था |लेकिन अच्छा खासा नहीं कमा पाता उन्हीं पैसों से उनको जीवन चलाना था| वह उदास होकर घर लौटने लगा ठीक उसी समय उसको तालाब के पानी में तैरते हुए एक भ्रष्ट दिखाई पड़ी| उसे देखते ही वह आश्चर्यचकित हो गया|सोचा इससे तो मैं अच्छे चित्र बना सकता हूं |

उसने ब्रश को उठा लिया |उसी खुशी में घर जाने लगा घर पहुंचते वह उस ब्रश से चित्र बनाना शुरू कर दिया|पहले कृष्ण ने एक सेब का चित्र बनाया तुरंत ही वह सजीव होकर बहुत सारे से उछलकर कागज से बाहर आ गए| पता चला कि वह एक जादुई ब्रश था |फिर कृष्ण ने एक आम का चित्र बनाया बहुत सारे आम जीवित होकर उछल पड़े वैसे ही सोने के सिक्के का चित्र बनाया|एक जगह बहुत सारे सिक्के प्रकट हुए इस तरह कृष्ण धनवान होने लगा|उसे जानने एक पड़ोसी घर के बाहर की खिड़की से अंदर जाने लगा|बात पता लगाया रात का समय पड़ोसी ने धीरे-धीरे कृष्ण के घर के अंदर आकर उस ब्रश को चुरा लिया|अपने घर जाते ही वह उस ब्रश से एक लकड़ी का चित्र बनाया तुरंत ही उस लकड़ी में जाना गए पड़ोसी को अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ| उसको अच्छा सबक भी मिला उसी से पड़ोसी को पिटाई हुई| अगले दिन पड़ोसी ने कृष्ण को उस जादुई ब्रश वापस कर दिया|

दोस्तों किसी के साथ बुरा नहीं करना चाहिए | इसलिए एक वह सोचने लगा कि अगले दिन में क्या करूंगा| फिर वह जादुई छड़ी लिया और रोने लगा|उसको एक याद आया कि आज मेरा मन है| सब्जी रोटी खाओ तू सुना सब्जी रोटी बनाना तो बनाने के बाद उसने खाना खा लिया| पेट भर के और जब वह नहाने गया तो फिर से एक बार सोहन आया| उसे चुरा लिया छुड़ाने के बाद उसने अपना घर ले गया घर ले जाने के बाद वह सोना चांदी बनाया| वह सचमुच असली सोना चांदी हो गया|इस तरह वह धीरे-धीरे जाकर करोड़पति बन गया|


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