लकड़हारा की कहानी और उसका परिश्रम

एक समय की बात है| विलास नाम का एक लकड़हारा एक घने जंगल में लकड़ियां काट रहा था |लकड़ियों काटते- काटते हुए वह बहुत थक गया|उसने सोचा मैं ऊपर पेड़ पर ही थोड़ा सो लेता हूं |और पेड़ की टहनियों पर आंखें बंद करके आराम करने लगा अभी 5 मिनट ही बीते थे | उसे ज़ोर ज़ोर से घोड़ों की आवाजें आने लगी बहुत घबरा गया और सोचने लगा इस समय इस जंगल में कौन आ गया अचानक |उसने महसूस किया कि सारे घोड़े जिस पेड़ पर वह आराम कर रहा था |अचानक उसने महसूस किया कि सारे घोड़े जिस पेड़ पर वह आराम कर रहा था| उसी के नीचे आकर रुक गए हैं |विलास चुपचाप पेड़ के ऊपर से नीचे देखने लगा उसने देखा कि सभी घोड़ों पर सफेद रंग के बालों वाले पुरुष बैठे हुए हैं |

सभी के हाथों में खतरनाक तलवारे हैं |इतने सारे लोगों के हाथ में नंगी तलवारें देखकर विलास बहुत डर गया |उसने देखा कि अचानक जो पुरुष सबसे पहले वाले घोड़े पर बैठा था |उसने पेड़ पर तलवार से वार किया और अचानक ही पेड़ के अंदर एक बहुत बड़ा दरवाजा खुल गया| वह सभी अपने अपने घोड़ों के साथ उस पेड़ में समा गए डर के मारे विलास कांप रहा था |उसे कुछ भी नहीं समझ आ रहा था |यह सब क्या हो रहा है |कुछ देर के बाद पीर का दरवाजा फिर से खुला और सारे घुड़सवार अपने अपने घोड़ों के साथ दरवाजे से बाहर निकले और गहरे जंगल में गायब हो गए| गुर्जरों की वापस चले जाने के बाद विलास पेड़ से नीचे उतरा और सोचने लगा कि आखिर यह सब कौन थे |और इस पेड़ के अंदर क्या है आपने सोचा अगले दिन पूरी तैयारी के साथ आकर इन लोगों का पीछा करूंगा| इस रहस्य का पता लगा लूंगा कि आखिर यहां क्या हो रहा है अगले दिन विलास पूरी तैयारी के साथ आया उसके हाथ में एक छोटा सा खाने का सामान पीने का पानी आदि सब था |

उनकी सारी गतिविधियों को ध्यान से देखने लगता उन्होंने पेड़ के सामने हाथ जोड़कर प्रार्थना की और कहा अदभुत पेड़ निराले पत्ते दे दो रास्ते धन के वास्ते पेड़ के तने में से एक दरवाजा निकल आया| सभी घुड़सवार एक-एक करके उसके अंदर चले गए| कुछ घंटों के बाद में घुड़सवार वहां से वापस बाहर आ गए और हाथ जोड़कर फिर से उन्होंने प्रार्थना की है तेरी रक्षा में भूल न जाना पेड़ किसी और की खातिर खोलना देना भेज तुरंत दरवाजा बंद हो गया |गुड सवारों के जाते ही विलास पेड़ के नीचे उतरा और गुड़ सवारों के समान ही बैठकर उसने दरवाजा खोलने के लिए प्रार्थना की अदभुत पेड़ निराले पत्ते दे दो रास्ते धन के वास्ते पेड़ के तने का दरवाजा खुल गया | विलास अंदर गया तो हीरे जवाहरात सोने चांदी आदि के पहाड़ ढके हुए थे इतना धन था |अगर कोई पूरी तरह से भी उठाई तो यह खजाना खत्म ना हो विलास उस खजाने को छूने का लालच रोक नहीं पाया | किंतु जैसे ही उसने एक मोती की माला को छुआ पेड़ का तना जोर से बंद हो गया और जोर जोर से आवाज आने लगी चोर चोर चोर चोर विलास को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था | वह बाहर कैसे जाएगा उसने दरवाजा खोलने के लिए मंत्र लाखों बार पढ़ डाला किंतु दरवाजा टस से मस नहीं हुआ अब मैं समझ गया कि यदि वह जल्दी से जल्दी बाहर नहीं गया| घुड़सवार आकर उसे मौत के घाट उतार देंगे इसलिए उसने अपनी जेब से खंजर निकाला |पेड़ के तने को अंदर से काटने लगा ताकि रास्ता बन सके कई घंटों की कड़ी मेहनत के बाद उसने एक छोटा सा छेद बनाया |जिसमें से अपना हाथ बाहर निकाल सकता विलास अपना हाथ बाहर निकाल कर जोर जोर से हिलाने लगा |

वहीं से कुछ मछुआरे गुजर रहे थे जब उन्होंने देखा कि पेड़ से एक हाथ बाहर निकला हुआ जोर-जोर से हिल रहा है | वह डर गए और उन्होंने इसकी सूचना गांव के सरपंच को दी सरपंच को लगा जरूर किसी भूत-प्रेत का काम होगा | उसने गांव के तांत्रिक को बुलाया और सारे गांव के साथ पेड़ की पूजा कराने चल पड़ा उन्होंने विलास के हिलते हुए हाथ पर तरह-तरह के जादुई धागे बांध दिए | उन पर जलता हुआ कपूर रख दिया और आंखें बंद करके पेड़ देवता की पूजा करने लगे हाथ पर कपूर रखने की वजह से विलास को जोर से दर्द हुआ |और उसने अपना हाथ अंदर खींच लिया जब गांव वालों ने देखा कि हाथ अंदर चला गया तो उन्हें लगा कि उनकी पूजा सफल हुई |और खुशी-खुशी वहां से जाने लगे किंतु अचानक पेड़ के अंदर से किसी के रोने की आवाजें आने लगी कोई कह रहा है मैं पेड़ में बंद हूं कृपया मुझे यहां से निकालो मुझे स्वतंत्र करो सरपंच को लगा शायद कोई देशदूत किसी श्राप के कारण पेड़ के रूप में यहां पर खड़ा है और मुक्ति चाहता है| और बाद में उसको मुक्ति मिल गई |


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