मूर्ख पंडित की कहानी

एक गांव में पंडित रहा करते थे | उन पंडितों ने अपने आपको गांव में सबसे ऊंची जाति का और बुद्धिमान समझने के कारण पंडितों को रहने के लिए एक अलग मोहल्ला बनाया हुआ था | जिसका नाम था| पंडितों का मोहल्ला असलियत में में केवल जाति से पंडित थे | किंतु बुद्धि कहीं से छू कर भी नहीं गई थी|लेकिन वह इस बात को मानने को कभी तैयार नहीं होते और हर बात में दखलअंदाजी किया करते थे|अपने आप को दूसरी जाति के लोगों से बड़ा दिखाने की कोशिश किया करते थे|एक बार कुंभ स्नान के समय पंडितों ने सोचा कि वह भी गंगा नदी में स्नान करके अपने पापों को धोएं |

इस तरह से 10 पंडित कुंभ के मेले में स्नान करने के के लिए जाने को तैयार हो गए | अगले दिन ही वह गांव से इलाहाबाद जाने के लिए निकल गए |दोपहर तक इलाहाबाद पहुंच गए सजाने के लिए और कुछ ही देर में संगम पहुंचे जब वहां पहुंचे|उन्होंने देखा कि भारतवर्ष के अधिकांश लोग ऐसा लगता है इलाहाबाद में ही आ गए हैं|चारों तरफ बहुत भीड़ थी छोटे से गांव में रहने के कारण पंडितों ने कभी इतनी भी नहीं देखी थी| उन्हें डर लगने लगा था कि कहीं वह भीड़ में छूट ना जाए| इसलिए उन्होंने एक उपाय सोचा उन्होंने कहा संगम में बेइंतेहा भीड़ है|लोग जोर जोर से धक्के मार रहे हैं |यदि नदी की तरफ देखें तो पानी का बहाव भी बहुत तेज है| जब हम संगम में नहाने के लिए उतरे एंगे तो दसों के दसों एक दूसरे का हाथ पकड़ लेंगे |जिसके कारण किसी का भी पानी में बह ना मुमकिन नहीं होगा|हम सब मिलकर आराम से नहा कर सुरक्षित अपने गांव वापस लौट जाएंगे |

ऐसा सोचकर नदी के पास आने के बाद दसों ने जोर से एक दूसरे का हाथ पकड़ लिया| नदी में उतरकर अपने पापों को धोने के लिए दुखिया लगाने लगे कि के साथ जोर से बोलते हर हर महादेव हर-हर गंगे|जब उन्हें महसूस हुआ कि उन्होंने अपने पापों को अच्छी तरह से धो लिया है|वह नदी से बाहर निकल आए बाहर आने के बाद उनमें से एक पंडित बोला चलो हम अब गिन लेते हैं|हम पूरे 10 है|

एक टोपी बेचने वाला हरिजन जाति का व्यक्ति बहुत देर से पंडितों का नाटक देख रहा थावह मूर्ख पंडित जब बाकी पंडितों को गिनना शुरु करते हैं तो खुद को बिल्कुल भूल जाते हैं इसीलिए बार-बार वह खुद को नौबत आते हैं| टोपीवाला बोला महाराज आप तो बड़े ज्ञानी हैं और मैं मूर्ख जाती वैसे भी मैं हरिजन हूं| मेरे पास जादुई टोपिया है यदि आप मुझसे तूतिया ले तो मैं आपके पंडितों को वापस गिनती में 10 कर सकता हूं| एक पंडित के खो जाने के भय से पंडित अपना पूरा जातिवाद भूल चुके थे |उन्होंने बोला हां हां जरूर जरूर टोपी वाले हम सब तुमसे एक एक टोपी खरीदने को तैयार हैं |तुम पंडितों की गिनती फिर से करके हमें 10 कर दो तो फिर आना बोला ठीक है |आप सभी मेरी जादुई टोपी पहन लीजिए और फिर इन टोक्यो को उतार कर जमीन पर रख दीजिए पंडितों ने ऐसा ही किया |उसके बाद टोपी वाले ने सारी दोषियों को पंडितों के सामने गिन कर बताया 10 टोपिया थी |पंडितों को विश्वास हो गया कि वे 10 ही है|वह बहुत खुश हुए |उन्होंने टोपी वाले को बहुत आशीर्वाद दिया स्ट होकर अपने घर चले गए टोपीवाला एक साथ 10 टोपिया बिकने के कारण बहुत खुश हुआ| और पंडितों की बुद्धि पर हंसता हुआ अपने घर चला गया| इस तरह टोपी वाले ने अपनी बुद्धि की मदद से अपने व्यापार को आगे बढ़ा दिया |और पंडितों को भी समझा दिया कि सिर्फ पंडित होने से कोई बुद्धिमान नहीं होता|


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