चतुर लालच में क्या अंतर है

छोटे से गांव लालनपुर में कुम्हार राजू अपनी दो बेटियों माया और रेखा के साथ रहता था| दोनों बहनों में बड़ी बहन माया चतुर और लालची थी| छोटी रेखा सीधी-सादी वह दोनों स्कूल जाती एक साथ पढ़ती|खेलते समय बीता और दोनों बड़ी हो गई अपने अलग स्वभाव की वजह से उन दोनों में अक्सर लड़ाई या बहस होती |इससे राजू बहुत परेशान रहता उन दोनों में आपसी प्यार बनाने के लिए राजू ने तरकीब सोची और अगले दिन सुबह उन दोनों को बुलाया|तुम दोनों बड़ी और समझदार हो गई हो |मैं अब तीर्थ यात्रा पर जाना चाहता हूं |

तुम दोनों एक साथ रहना और एक दूसरे का ध्यान रखना यह कहकर बाबूजी चले गए|कुछ दिन बीते उन दोनों में खूब झगड़ा हुआ|गांव की पंचायत को बुलाकर घर का बंटवारा कर दिया| सब कुछ बांटने के बाद उनके पास एक कंबल गाय और आम का पेड़ है क्या लालची माया झट से बोली आपने अपना कीमती समय निकाला हमारे लिए शुक्रिया यह तीनों बहुत छोटी चीज है |हम आपस में ही बांट लेंगे मेरी छोटी बहन मैया कंबल रात को लूंगी| तुम दिन में इसका इस्तेमाल करना गाय का पीछे का हिस्सा मेरा और आगे का तुम्हारा और पेड़ के ऊपर ध्यान रखूंगी| बोली इतनी तेज होती और रात को जब सर्दी होती तो वह माया को देना पड़ता|खुद ठंड से कांपती रेखा को गाय का अगला हिस्सा मिला था|उसे दोष चारा खिलाना पड़ता और माया रोज गाय का ताजा दूध निकाल करती थी|दही जमा दी आम के पेड़ को रोज पानी देती और ऊपर के हिस्से से बड़ी बहन रोज मजेदार आम तोड़कर खातेगांव में अपनी मौसी के घर गई|उन्हें निकाल सकती हूं| वैसा ही करूंगी और घर को जल्दी और शाम रेखा ने माया को ठंडे पानी में डूबा हुआ किला कंबल दिया और माया रात भर ठंड में काम पी रही सुबह जमाया दूध निकाल रही थी|गाय ने उसे लात मारी गाय भूखी थी|क्योंकि रेखा ने चारा देना बंद कर दिया था| माया हैरान थी कि यह क्या हो रहा है गुस्से में माया आम तोड़ने गई |

उसने देखा कि रेखा पेड़ काट रही थी यह देखकर उसने देखा से पूछा यह क्या कर रही हो|मैं अपने हिस्से का पेड़ काट रही हूं| लकड़ी बेचकर खाना खाऊंगी यह सुनकर माया शर्मिंदा हुई उसे समझाया कि अपनी बहन के साथ बहुत गलत कर रही है|उसने माफी मांगी और साथ रहने को कहा और खाती इस कहानी से हमने सीखा कि आपस में प्रेम से रहने में ही खुशी है|अच्छाई का गलत फायदा नहीं उठाना चाहिए |


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