चंदू की कहानी और नागिन

एक गांव के पास में एक बड़ा घना जंगल था | गांव में जल्दी ही नाग पंचमी का त्यौहार आने वाला था| सभी लोग नाग पंचमी की तैयारी जोर शोर से कर रहे थे |इस छोटे से गांव में एक शिवालय था |जिसकी विशेष बात यह थी कि यहां एक नागिन रात दिन शिवलिंग से लिपटी रहती थी|किसी को भी इसके आसपास बुरी नियत से नहीं फटकने देती थी |यहां तक कि वह नागिन किसी भी शिवभक्त के साथ कुछ बुरा नहीं होने देती थी| अगर कोई भी किसी से भक्तों को तकलीफ पहुंचाने की कोशिश करता तो न जाने इस नागिन को कैसे पता चल जाता| वह उसे जाकर डसले थी इसलिए इस नागिन को लोग नागिन मां के नाम से पुकारा करते थे|यह नागिन असलियत में एक इच्छाधारी नागिन थी जो सैकड़ों वर्षों से इस शिवलिंग की पूजा कर रही थी| उसकी पूजा से खुश होकर भगवान ने उसे महीने में हर पूर्णिमा और एकादशी को रूप बदलने की शक्ति का आशीर्वाद दिया था |

उनके आशीर्वाद के अनुसार एकादशी और पूर्णमासी को अपनी इच्छा अनुसार रूप में अपने आप को बदल कर अपना जीवन जी सकती थी|लेकिन इसके साथ ही उसे इस बात का भी ध्यान रखना था कि अगर उसने इन दोनों दिनों में रूप बदलने के बाद किसी का भी बुरा किया तो वह हमेशा के लिए गधी के रूप में परिवर्तित हो जाएगी|लोग उसे मुफ्त में काम कराकर उसे सम्मान देने के बदले डंडों से मारा करेंगे एक बार गांव में सूखा पड़ गया|जिसके कारण गरीब किसान चंदू और उसकी पत्नी सुमित्रा की मृत्यु हो गई| इन दोनों का एक 18 वर्ष का बेटा था जिसका नाम उन्होंने भोपू रखा था|दुख की बात यह थी कि भोपू आयु में 18 वर्ष का था |लेकिन उसकी बुद्धि मात्र 5 वर्ष के बच्चों जैसी थी|माता पिता की मृत्यु हो जाने के कारण वह बड़ा ही उदास होकर भूखा प्यासा बैठा रहता था| यदि उसकी मां जिंदा होती तो उसे जबरदस्ती खिलाती पिलाती थी |पर अब माता-पिता ना होने के कारण कोई भी नहीं था |जो उसका ध्यान रखें इसलिए वह मंदिर में बैठा जोर जोर से रोता रहता था लेकिन वह एक बड़ा ही दयालु और नेत्र युवक था वहां बैठे-बैठे भी जब भी किसी गरीब आदमी को मुसीबत में देखता तो उसकी बिना किसी दाम के मुफ्त में मदद करता इच्छाधारी नागिन यह देखती और साथ में यह भी देखती कि मंदिर में इतने सारे लोग आते हैं |

सब भगवान की पूजा करते हैं लेकिन उस दयालु और नेक दिल युवक भोंपू पर कोई ध्यान नहीं देता|सभी उसे पागल समझ कर किनारे से निकल जाते आखिरकार एकादशी का दिन आ गया और भोपू की मां के रूप में बापू के पास आई |बोली अरे भोपू तुम मंदिर में बैठ कर क्या कर रहे हो सुबह से तुमने कुछ खाया या नहीं खाया |मैं भगवान के पास चली गई हूं | रोज ऊपर से तुम्हें देखती हूं तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम मेहनत करोगे | भरपेट खाना खाकर मुझे कभी शिकायत का मौका नहीं दोगे|लेकिन मैं देखती हूं कि तुम हमेशा ऐसी मंदिर में बैठ कर रोते रहते हो और कोई अगर देता है तो खाना खाते हो लेकिन खुद खाना खाने के लिए कुछ भी मेहनत नहीं करते| मां को सामने देखकर भोपू बड़ा ही खुश हुआ| बोला मां तुम क्यों चली गई हो तुम्हारे बिना मुझे कुछ भी अच्छा नहीं लगता मुझे घर भी अच्छा नहीं लगता| मां नहाना धोना खाना पीना कुछ भी अच्छा नहीं लगता अगर तुम मुझसे वादा करो कि तुम रोज मुझसे मिलने आओगी |


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