कड़ी मेहनत का फल

एक गांव में रामू नाम का एक बहुत ही शैतान आदमी रहा करता था| वह किसी पर दया ना करता और जो चाहता लोगों से छीन लिया करता था| यह देखकर गांव के लोगों को बहुत परेशानी होने लगी| वह उससे बचाव के लिए रास्ते ढूंढने लगे| एक बार गरीब किसान हरीश अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गई फसल बेचकर मिले पैसों से अपनी पत्नी के लिए दवाइयां और फल आदि लेकर आ रहा था| रामू ने उसे पकड़ लिया और उससे पैसे आदि मांगने लगा हरीश लाख रोया चिल्लाया पर रामू ने सारी दवाइयां फेंक दी| फल छीन कर ले गया बिना दवाई हरीश की पत्नी की मौत हो गई |अब हरीश का कोई था हरीश ने फैसला किया कि वह रामू को सजा जरूर देगा| और जंगल में जाकर कठोर तप करने लगा उसी जंगल से एक परी जा रही थी |

जब उसने हरीश को तब करते देखा तो उसे हरीश पर दया आई और वह बोली बोलो बेटे तुम क्या चाहते हो तो हरीश ने उसे रामू के अत्याचार के बारे में सारी बात बताई | जिसे सुनकर परी बोली बेटा मैं तुम्हारी और कोई तो सहायता नहीं कर सकती पर तुमको यह माला देती हूं यह जादुई माला है| इसे पहनते ही तुम अदृश्य हो जाओगे और तुम्हें कोई नहीं देख पाएगा रामू को सजा देने के लिए इसका क्या इस्तेमाल करोगे| तुम सोचो और चली गई हरीश ने माला को पहना और सीधा ओके घर चला गया उस समय सो रहा था| उसने एक बाल्टी पानी रामू पर डाल दिया रामू को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर उसके ऊपर पानी कहां से आया जब रामू नहाने गया| तो हरीश ने उसके कपड़े छुपा दिए इसी तरह कपड़े ढूंढ कर रामू बाहर आया | वह भाग गया था उसने देखा उसके कमरे का सब सामान एक के ऊपर एक रखा हुआ है |

रामू को लगा उसने इतने लोगों को सताया है जरूर किसी का भूत उसे तंग कर रहा है वह हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा उसी समय किसी ने उसे धक्का दे दिया |और जोर से गिर पड़ा प्रेम मदद के लिए चिल्लाने लगा पर नाराज गांव वाले उसकी मदद को नहीं |आए हरीश उन्हें न खाने देता न सोने अपनी जान बचाकर वह जंगल की ओर भागने लगा |तो हरीश उसे उसी जगह ले आया जहां उसने उसकी दवाइयां छीनी थी |और बोला जाओ रामू तुम हरीश की पत्नी को वापस ले आओ तो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा रामू बोला पर वह तो मर गई हरीश ने कहा तुम उसकी मौत का कारण हो अब हरीश अकेला है| वह किसके सहारे चाहिए गा तो रामू हाथ जोड़कर बोला मुझे माफ कर दो|

मैं कड़ी मेहनत करके सारी उम्र हरीश का ध्यान रखूंगा हरीश ने कहा तुम दूसरे गांव वालों को भी सताते हो तुम्हें कौन देगा रामू ने वादा किया कि वह किसी को दुख नहीं पहुंचाएगा| हरीश ने अदृश्य रूप में ही रामू से कहा जाओ और हरीश से मदद की भीख मांगो और माफी मांगो अगर उसने माफ कर दिया |तो मैं तुम्हें सताना बंद कर दूंगा हरीश के घर पहुंचा वहां हरीश पहले ही पहुंच गया था और माला उतार कर रामू का इंतजार कर रहा था| रामू ने कहा हरीश मुझे माफ कर दो और अपने खेत में मुझे काम दे दो मैं सारी उम्र तुम्हारी देखभाल करूंगा हरीश ने रामू को माफ कर दिया| और रामू सारी उम्र हरीश का सेवक बनकर जिंदगी बिताने लगा |और इस प्रकार अपनी चतुराई और जादुई माला की मदद से हरीश ने रामू को सजा दी और सही राह पर ले आया|


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*